पार्टी का जन्म एक सोच की संघर्ष के साथ हुआ। एक गरीब घर से होने के नाते वो सारे दुख और दर्द जो आम जनता चाहे व किसान हो, एक आम परिवार हो, एक नौकरशाही मध्यवर्गी परिवार हो, बेरोजगार युवा, गरीब बुजुर्ग सभी परेशान थे। ये परेशानी कोई नई नही थी आजादी से पहले और आजादी के बाद ये सदियो पुरानी समस्या थी।

एक समाज सेवक जो रात दिन इन्ही वर्ग समूह के बीच अपना समय व्यतीत करता था और इन्ही के दुख निवारण में बिना कुछ खाये पिये सारा दिन सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटता था, सिर्फ इस लिए की गरीबो, पिछडो, दबे-कुचले, शोषित, जो सरकारी लाभ से वंचित है या किसी अन्य प्रकार की कोई समस्या हो उनकी समस्या का निवारण हो सके।

जब वो अन्तरात्मा से थक कर एकांत में सोचने लगे कि ऐसे इस विकट परिस्थिति का हल नही निकलेगा तब उन्होंने सर्व समाज के हित के लिए एक छत का निर्माण करने की सोच रखी। भारत की अंखडता, प्रभुता को कायम रखने के लिए “जन कल्याण पार्टी” के निर्माण की सोची। हालांकि एक छोटे से मध्यवर्गी परिवार के व्यक्ति के लिए ये कदम चुनौतियों से भरपूर था।

जब उन्होंने अपनी इस सोच को अपने साथियों के साथ साझा किया तब उनके सहयोगी श्री मक्खन लाल केशरवानी (पूर्व चेयरमैन, चायल, कौशाम्बी, कांग्रेसी नेता), श्री देशराज भारतीय (समाजसेवक), श्री मिथलेश सिंह (इंटर कॉलेज के कर्मचारी), श्री श्रीनाथ साहब (रिटायर्ड केंद्रीय कर्मचारी व वर्तमान कबीरपंती के महान महंत), श्री दयाशंकर गुप्ता (पूर्व राम गंगा कमांड परियोजना के भूमि संरक्षण अधिकारी), श्री सुरेश पटेल (कृषक एवम समाजसेवी) एवम अन्य का सहयोग व समर्थन प्राप्त हुआ। जिससे आत्म विश्वास को एक नई ऊर्जा मिली।

पार्टी की पहली अनौपचारिक बैठक नवंबर 2013 में नेवादा ब्लॉक पार्टी गृह जनपद कौशाम्बी में उपरोक्त सदस्यो के साथ कि गयी जिसमे पार्टी के प्रारंभिक सदस्यो का चुनाव, पदाधिकारियो का चुनाव, पार्टी की नीतियां, पार्टी का उद्देश्य एवम तमाम विषयो पर चर्चा की गई।

इस बैठक के उपरांत अन्य तमाम अनौपचारिक बैठके की गई। पार्टी के सोच के बारे में तमाम भाई बहनों से चर्चाएं एवम मीटिंगे की गई क्योंकि हमारा उद्देश्य उनकी भलाई के लिए था। इसलिये उनका मत लेना अवश्य था। पहली बार ऐसा दृश्य किसी दल से देख कर वो लोग अचम्भित हो गए और पार्टी की नीतियों एवम उद्देश्य को काफी सराहा एवम अपने सोच व्यक्त किये। उन सभी का हम धन्यवाद करते है ।

ये कार्यक्रम कोई एक दिन या महीने तक नही चला बल्कि पूरे दो साल तक चला, अलग अलग प्रान्तों शहरों के किसान, युवा, महिलाये, बुजुर्गो सभी के सोच एवम अपनी सोच का आदान प्रदान किया गया।

इसके उपरांत दिनांक 8 सिंतबर 2015 को आयोग के समक्ष पार्टी की रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन सौपा गया। आयोग की औपचारिक गतिविधियों के बाद अंततः दिनांक 17 अगस्त 2016 को पार्टी को राजनीतक दल के रूप में स्वीकार कर लिया गया।

जन कल्याण पार्टी लम्बे समय से संघर्ष कर रही है। अब तक कई राज्यो में चुनाव में भागीदारी भी कर चुकी है। पार्टी ने अपना सर्वप्रथम चुनाव उत्तर प्रदेश में लड़ी। उसके बाद कई अन्य राज्यो में भी लड़ चुकी है।

जन कल्याण पार्टी की सोच किसी एजेंडे पर नही है, बल्कि विकास से जुड़ी है जो जमीनी हकीकत से वाकिब है।

Share on facebook
Facebook
Share on twitter
Twitter
Share on linkedin
LinkedIn
Share on reddit
Reddit
Share on whatsapp
WhatsApp