देश के प्रति सत्यनिष्ठा – जन कल्याण पार्टी

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सत्यनिष्ठा का तात्पर्य – यह है कि नैतिक कर्त्ता अपनी अंतः मान्यताओं के अनुसार कार्य करता है। उसका काम पाखंड या धोखे से मुक्त होता है और साथ ही, उसके द्वारा निर्धारित मूल्यों के अनुरूप होता है। अर्थात प्रतयेक देशवासी आम जन से लेकर भारत के प्रथम नागरिक का यह दायित्व बनता है की अपने कार्यो को अन्तः मन से, पूर्ण लग्न से, बिना किसी भेद भाव के, अपने कार्यो को पूरे ईमानदारी से निभाना चाहिये। यही सच्ची देशभक्ति और सत्यनिष्ठा कहलाती हैं।

आज देश में संकट की इस घड़ी में भी पूरा देश एक साथ खड़ा है। मजदूर से लेकर बड़े बड़े उद्योगपति तथा स्टार्टअप कम्पनी संकट से जूझ रहे है। मानव हित में सरकार लोगों को बेरोजगार तो बना ही दिया है । देश के हर संकट के साथ देशवासियों ने सरकार का खुलकर साथ दिया लेकिन वर्तमान सरकार इसको नजरअंदाज करते हुए सभी सपनों के संकल्प पत्र के प्रति एक भी काम नहीं किए।

वहीं कांग्रेस पार्टी अन्य तमाम राजनीतिक पार्टी भाजपा सरकार के सामने खुलकर विपक्षी कहलाए जाने वाले सभी पार्टी पंगु की तरह काम कर रही हैं। आज तक महामारी बीमारी में सरकार कोई ठोस कदम उठाने से बच रही है जब कोविड-19 की शुरुआत थी या थी ही नही। तब सरकार लोगो के प्रति काफी सजग थी इतना कि लोगों को घरों में कैद कर दिया गया।

55 दिनों के भीतर जब सरकार की भी स्थिति खराब हुई तो अपनी सरकारी कोष को भरने के लिए सभी तरह की व्यवसायों को खोल दिए क्या अब कोविड-19 से सरकार को भय नही लग रहा। या फिर पूर्णत: असफल हो गयी है। जो लोग व्यापार करते हैं, जीएसटी भरते हैं अर्थात व्यापारी है उनका माल कंपनी से दुकान तक नहीं पहुंच रहा है। व्यापारियों के इस समस्या के लिए सरकार ने कोई कदम उठाया?

ऑनलाइन बिज़नेस को बढ़ावा देना ठीक है देश को नई दिशा में ले जाना अति उत्तम एवम सराहनीय कदम है। पर सरकार की चाल है कि सिर्फ ऑनलाइन बिजनेस को बढ़ावा देना लोगों का रोजगार छीनना नौकरियों को समाप्त करना नए नए कानून बनाना तत्काल उसे लागू करना बिना विपक्षी दल से विचार विमर्श किये बिना देश में लागू हो जाता है तो देशवासियों को पता चलता है।

अर्थात सरकार तानासाही का माहौल बना रही है। शिक्षार्थियों के लिए कोई भी विकल्प ना देना बच्चों को भी परेशान होना पड़ सकता है। ना तो संसाधन उपलब्ध है ना कोविड-19 के चलते दुकानें खुलती हैं यदि बच्चों को स्वास्थ्य के बारे में किसी भी नेता चाहे वह भाजपा के हो या अन्य पार्टी के लोग हैं इस पर चर्चा नहीं करते।

आज के दौर में टीवी डिबेट में भाग लेते है और बोल कर चले जाते हैं उनको शायद सिर्फ अपनी पार्टी के नेताओ का गुणगान करने के अलावा कुछ नही आता। देश मे नकारात्मक मानसिकता को जन्म देने वाले तथ्यों एवम विषयो का अनुसरण या चयन करते व करवाते है।

परिणाम स्वरूप लोग आपस मे हीनभावना के शिकार हो जाते है। धार्मिक, जाती पात, में बाटने का कार्य करते है। क्या इनकी नैतिक जिम्मेदारी यही है? देश के प्रति सच्ची सत्यनिष्ठा यही है? इन सभी पर एक बार अवश्य विचार करे।

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